Thursday, September 8, 2016

प्रथम प्रेम-पाती




देह की घूमावदार लकदक , ललचा देने वाली, मन को मोह लेने वाली सौन्दर्य और वासना से कहीं कोसो दूर...........
बस झांकता हूँ आपकी आँखों में , जो इक समंदर सा एहसास देती है, आपके आँखों की मासूमीयत आपकी रूह़ में डूबकी लगाने का मौका देती है। अजीब सी कैफीयत तारी हो जाती है...जब मेरी रूह आपकी रूह में समा जाती है....शायद आपको इसका एहसास ना होता होगा.....। चाँद की चाँदनी में जुगनूं की क्या बिसात....।





य़कीन मानीए अब मैं ताउम्र इसी चाँदनी में जुगनूं बनकर तैरना चाहता हूँ।





कुछ चीजें , कुछ बातें हवा में तैरती रहती है....मेरा प्यार,मेरी मोहब्बत,मेरा इश्क भी बस आपकी रूह़ के चाँदनी हवाओं में तैर रहा है.. बस अब खुशबू की तरह आपके रूह़ के समन्दर में फना हो जाने की जुस्तजू़ रह गई है ।





देह की घूमावदार लकदक , ललचा देने वाली, मन को मोह लेने वाली सौन्दर्य और वासना से कहीं कोसो दूर..... .ये रूह़/आत्माओं का स्पर्श ही है जो अनंत काल तक प्रेम को जीवित रखती है।





तुम्हारा.....

2 comments:

  1. पढ़ कर प्यार से इश्क हो गया। ये इश्क है ही इतनी पाकीजा, कभी मीरा कभी रसखान तो कभी हमें सराबोर करती है।

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